आनंद ही जीवन का महामंत्र The Ultimate Mantra of Life is Joy
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आनंद ही जीवन का महामंत्र....
The Ultimate Mantra of Life is Joy
मनुष्य परमात्मा की सर्वोत्तम कृति कहलाता है, लेकिन मनुष्य स्वयं मानता है कि वह परमात्मा की सबसे बड़ी भूल है। यही भ्रम उसे जीवन में लगातार एक ही लक्ष्य की ओर धकेलता है, वो है "आनंद" ।
आनंद की परिभाषा उतनी ही उलझी हुई है जितनी गणित की किताब। हर किताब में अलग, हर शिक्षक के हिसाब से उसका उल्टा।
लेकिन दुनिया के सभी महान विचारक, ऋषि, वैज्ञानिक, बाबाजी, यूट्यूबर, रील क्रिएटर, कोच, मोटिवेशनल वकता और नुक्कड़ पर बैठा चायवाला, सभी एक ही बात पर सहमत हैं... कि “आनंद लेना चाहिए… चाहे किसी भी तरीके से लेना पड़े।”
यूँ तो आनंद प्राप्त करने के अनगिनत रास्ते हैं, किंतु संक्षेप में कुछ रास्ते,जो आम से है, उन पर प्रकाश डाल रहा हूँ। इसके अलावा बाकी आप भी बहुत से अन्य रास्तों से परिचित होंगे, जो शायद आपके घर से या आसपास से गुजरते होंगे...
1-- बिस्तर का आनंद
बिस्तर पर पड़े रहने का आनंद सबसे महान है। अलार्म बजते ही लगता है जैसे कोई आतंकवादी हमला हो गया हो। करवट बदलने का सुख ही जीवन का सबसे बड़ा पुरस्कार है। डॉक्टर भी कहते हैं "आराम करो", यानी बिस्तर का आनंद वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित है। नींद की क्रांति ही असली क्रांति है, बाकी सब तो बस दिखावा है।
2-- खाने का आनंद
खाने का आनंद सबसे लोकतांत्रिक है। कोई घर का खाना खाकर आनंदित होता है, कोई बाहर का गलीच खाना खाकर। बीमारी तक को लोग नज़रअंदाज़ कर देते हैं क्योंकि मसालेदार चटोरी चाट का आनंद ही जीवन का असली धर्म है। पेट खराब हो जाए, गैस बन जाए, डॉक्टर मना कर दे तो क्या, आनंद का स्वाद वही है जो मसालेदार चटोरी चाट में मिलता है।
3-- चुगली और निंदा का आनंद
चुगली का आनंद सबसे सस्ता और सबसे लोकप्रिय है। इसमें कोई खर्चा नहीं, कोई टिकट नहीं, कोई लाइसेंस नहीं। बस ज़ुबान चाहिए और सामने सुनने वाला बेवकूफ़। चुगली से ही समाज में नई-नई कहानियाँ जन्म लेती हैं। यह आनंद इतना लोकतांत्रिक है कि हर कोई इसमें भाग ले सकता है।
4-- अपराध का आनंद
कानून कहता है अपराध मत करो। लेकिन आनंद का संविधान कहता है: "जहाँ, जैसा, जो भी आनंद मिले, वही सही है।" कोई झूठ बोलकर आनंदित होता है, कोई चोरी करके, कोई रिश्वत लेकर। अपराध में भी आनंद है और यही उसका सबसे बड़ा विरोधाभास है।
5-- धर्म और अनाचार का आनंद
आनंद का विरोधाभास यही है कि कोई इसे भगवान में ढूँढता है, कोई इसे वासना में। कोई मंदिर जाकर आनंदित होता है, कोई डिस्को जाकर। कोई ध्यान लगाकर आनंदित होता है, तो कोई मोबाइल पर रील देखकर। ऐसे लोगों का तर्क होता है कि ईश्वर भी शायद यही सोचते होंगे कि आनंद तो मिल रहा है ना, फिर चाहे मंदिर में मिले या होटल में।
6-- पर्यटन और मनोरंजन का आनंद
कुछ लोग कहते हैं कि आनंद यात्रा में है। कोई पहाड़ों पर जाकर आनंदित होता है, कोई समुद्र किनारे जाकर। कोई बस टिकट लेकर आनंदित होता है, कोई बिना टिकट पकड़े जाने पर भी। फिल्मों का आनंद भी अलग है, चाहे फिल्म अच्छी हो या बुरी, टिकट खरीदने का आनंद ही सबसे बड़ा है।
7-- रोने और बीमार होने का आनंद
यह सबसे अजीब आनंद है। कोई रोकर आनंदित होता है, कोई अपने आप को बीमार घोषित कर। बीमारी को भी लोग आनंद का साधन बना लेते हैं। टेस्ट न कराने का आनंद भी अलग है, क्योंकि कुछ न निकलने पर सारा आनंद खत्म हो जाता है।
8-- राजनीति का आनंद
राजनीति में आनंद सबसे बड़ा है। नेता चुनाव हारकर भी आनंदित रहते हैं, क्योंकि उन्हें मुफ्त में गालियाँ मिलती हैं। चुनाव जीतने का आनंद तो अलग ही है, जैसे किसी ने लॉटरी दे दी हो। जनता वोट डालकर आनंदित होती है, क्योंकि उसे लगता है कि उसने देश बदल दिया।
9-- ऑफिस का आनंद
ऑफिस में आनंद के कई रूप हैं। बॉस की डाँट सुनकर भी कर्मचारी आनंदित होता है, क्योंकि उसे पता है कि बॉस खुद भी डाँट खाता है। मीटिंग का आनंद सबसे बड़ा है। लोग मीटिंग में सोते हैं और कहते हैं "ब्रेनस्टॉर्मिंग हो रही है।" चाय ब्रेक का आनंद ऑफिस का असली धर्म है।
10-- पड़ोसियों का आनंद
पड़ोसी का आनंद सबसे लोकतांत्रिक है। कोई पड़ोसी की बुराई करके आनंदित होता है, कोई निंदा करके। कोई पड़ोसी की सफलता देखकर जलकर आनंदित होता है। पड़ोसी का आनंद इतना महान है कि इसमें हर कोई विशेषज्ञ है।
11-- बच्चों का आनंद
बच्चों का आनंद सबसे मासूम है। बच्चे खिलौने तोड़कर आनंदित होते हैं, होमवर्क न करके आनंदित होते हैं। मोबाइल छीनकर खेलने का आनंद सबसे बड़ा है। रोने का आनंद भी बच्चों का सबसे बड़ा हथियार है।
12-- शादी-ब्याह का आनंद
शादी में आनंद का लोकतंत्र सबसे बड़ा है। दूल्हा आनंदित होता है कि उसे दुल्हन मिली, दुल्हन आनंदित होती है कि उसे दूल्हा मिला। मेहमान आनंदित होते हैं कि उन्हें मुफ्त का खाना मिला। शादी का असली आनंद तो खाना ही है, बाकी सब तो खर्चा है।
13-- ट्रैफिक का आनंद
ट्रैफिक में भी आनंद है। कोई हॉर्न बजाकर आनंदित होता है, कोई गाली देकर। कोई ट्रैफिक पुलिस को देखकर आनंदित होता है। ट्रैफिक का आनंद इतना महान है कि लोग गाली देने को भी लोकतांत्रिक अधिकार मानते हैं।
14-- मोबाइल का आनंद
मोबाइल सबसे बड़ा आनंद का साधन है। कोई कॉल करके आनंदित होता है, कोई कॉल काटकर। कोई बैलेंस खत्म करके आनंदित होता है। नेट स्लो होने का आनंद भी अलग है, इंतज़ार का रोमांस मिलता है।
15-- टीवी सीरियल का आनंद
टीवी सीरियल में आनंद सबसे बड़ा है। कोई रोकर आनंदित होता है, कोई हँसकर। कोई विलेन देखकर आनंदित होता है। बहू रो रही है, लेकिन आनंद तो दर्शकों को मिल रहा है।
16-- पढ़ाई और परीक्षा का आनंद
पढ़ाई का आनंद सबसे बड़ा विरोधाभास है। बच्चे किताब खोलकर सो जाते हैं और कहते हैं "ज्ञान का आनंद ले रहे हैं।" परीक्षा में नकल करने का आनंद सबसे लोकप्रिय है। रिज़ल्ट आने पर रोने का आनंद भी अलग है।
17-- सरकारी दफ्तर का आनंद
सरकारी दफ्तर में आनंद का लोकतंत्र सबसे बड़ा है। लाइन में खड़े रहने का आनंद, फॉर्म भरने का आनंद, बाबू की कुर्सी पर बैठे-बैठे चाय पीने का आनंद। इंतज़ार का आनंद ही असली आनंद है।
18-- सोशल मीडिया का आनंद
आज के दौर में आनंद का सबसे बड़ा ठिकाना है — सोशल मीडिया। कोई लाइक देखकर आनंदित होता है, कोई कमेंट पढ़कर। कोई दूसरों की DP देखकर आनंदित होता है, कोई फॉलोअर्स गिनकर। असली जीवन भूलकर लोग आभासी आनंद में जीते हैं।
19-- गाँव और शहर का आनंद
गाँव में आनंद अलग है, शहर में अलग। गाँव में लोग बैल देखकर आनंदित होते हैं, शहर में लोग ट्रैफिक देखकर। गाँव में कुएँ पर बैठकर आनंद, शहर में मॉल में घूमकर आनंद।
20-- फैशन का आनंद
फैशन में आनंद सबसे बड़ा है। कोई नए कपड़े पहनकर आनंदित होता है, कोई पुराने कपड़े पहनकर भी। फैशन का आनंद इतना लोकतांत्रिक है कि इसमें हर कोई अपनी पसंद का चुनाव कर सकता है। कोई महंगे ब्रांड पहनकर आनंदित होता है, तो कोई सड़क किनारे से खरीदी गई टी-शर्ट पहनकर। असली आनंद दूसरों को देखकर जलने में है, क्योंकि फैशन का असली मक़सद यही है कि लोग कहें "वाह, कितना बदल गया है।"
21-- डॉक्टर और हॉस्पिटल का आनंद
डॉक्टर और हॉस्पिटल में भी आनंद है। कोई दवा खाकर आनंदित होता है, कोई इंजेक्शन लगवाकर। रिपोर्ट देखकर भी लोग आनंदित होते हैं। बीमारी का आनंद ही सबसे बड़ा है क्योंकि इसमें ध्यान, सहानुभूति और छुट्टी सब मिलती है। हॉस्पिटल का आनंद यह है कि वहाँ हर कोई विशेषज्ञ बन जाता है, कोई कहता है दवा लो, कोई कहता है दवा छोड़ो।
22-- आधुनिक टेक्नोलॉजी का आनंद
टेक्नोलॉजी में आनंद सबसे बड़ा है। कोई मोबाइल बदलकर आनंदित होता है, कोई लैपटॉप खरीदकर। वाई-फाई पकड़ने का आनंद भी अलग है। नेट स्लो होने का आनंद भी अलग है क्योंकि इंतज़ार का रोमांस मिलता है। टेक्नोलॉजी का आनंद इतना महान है कि लोग असली जीवन भूलकर आभासी जीवन में जीते हैं।
23-- त्योहारों का आनंद
त्योहारों में आनंद सबसे बड़ा है। कोई मिठाई खाकर आनंदित होता है, कोई पटाखे फोड़कर। कोई पड़ोसी की बिजली देखकर जलकर आनंदित होता है। त्योहार का आनंद इतना महान है कि इसमें हर कोई विजेता है। त्योहारों का असली आनंद यह है कि लोग साल भर की कमाई एक दिन में खर्च कर देते हैं और फिर कहते हैं "वाह, कितना आनंद आया।"
24-- क्रिकेट का आनंद
क्रिकेट में आनंद का लोकतंत्र सबसे बड़ा है। खिलाड़ी रन बनाकर आनंदित होता है, दर्शक गाली देकर। हार जाए तो टीवी तोड़ने का आनंद, जीत जाए तो पड़ोसी को ताना मारने का आनंद। क्रिकेट का आनंद इतना महान है कि इसमें हारने वाला भी आनंदित होता है क्योंकि उसे बहाने बनाने का मौका मिलता है।
25-- गाँव और शहर का आनंद
गाँव में आनंद अलग है, शहर में अलग। गाँव में लोग बैल देखकर आनंदित होते हैं, शहर में लोग ट्रैफिक देखकर। गाँव में कुएँ पर बैठकर आनंद, शहर में मॉल में घूमकर आनंद। गाँव का आनंद यह है कि लोग बिना काम किए भी खुश रहते हैं, शहर का आनंद यह है कि लोग काम करके भी दुखी रहते हैं।
26-- शिक्षा और ज्ञान का आनंद
शिक्षा का आनंद में सबसे बड़ा विरोधाभास है। बच्चे किताब खोलकर सो जाते हैं और कहते हैं "ज्ञान का आनंद ले रहे हैं।" परीक्षा में नकल करने का आनंद सबसे लोकप्रिय है। रिज़ल्ट आने पर रोने का आनंद भी अलग है। शिक्षा का आनंद यह है कि लोग डिग्री लेकर भी कहते हैं "आनंद तो नौकरी में है।"
कुल मिला कर देखा जाए तो एक ही निष्कर्ष निकालता है कि आज कल बहुसंख्य लोगों का असली लक्ष्य अपने जीवन में अपने अपने तरीके से आनंद प्राप्त करना ही है। चाहे वह कैसे भी मिले... सीधी सी बात भाई साहब, आनंद ही जीवन का महामंत्र है...
अंतिम विनम्र निवेदन...🙏
यदि इस लेख में प्रयुक्त प्रतीक चित्र या विचारों से किसी को ठेस पहुँची हो, तो वह अनजाने में हुआ है। उद्देश्य केवल सामाजिक जागरूकता की पुनर्स्थापना है।
मनोज कुमार भट्ट, कानपुर
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मनोज भट्ट कानपुर ...
